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भगवद गीता 9.27

यत्करोषि यदश्नासि यज्जुहोषि ददासि यत्। यत्तपस्यसि कौन्तेय तत्कुरुष्व मदर्पणम्॥

हे कुंती-पुत्र, तुम जो भी करो, जो भी खाओ, जो भी अर्पित या दान करो, जो भी तप करो, वह सब मुझे समर्पित करके करो।
  • surrender
  • devotion
  • purpose
  • meaning

यह श्लोक किस बारे में है

यह श्लोक समर्पण और अपने रास्ते से जुड़ता है।

चिंतन

एक साधारण दिन पवित्र इसलिए नहीं बनता कि उसमें क्या हुआ, बल्कि इसलिए कि तुमने उसे कैसे लिया।

एक छोटा अभ्यास

आज एक छोटा काम, खाना, चलना, जवाब देना, पूरे ध्यान से करो, एक अर्पण की तरह।

अध्याय 9

राज विद्या राज गुह्य योग

भक्ति, सबसे सीधा रास्ता। जो तुम सच्चे मन से चढ़ाओ, पत्ता, फूल, फल, पानी, वह दिव्य तक पहुँच जाता है।

ये मन के सवाल जिनसे यह श्लोक जुड़ता है

ऐसे सवाल जो असली लोग मन में उठाते हैं, और जिन पर यह श्लोक कुछ कहता है।

इस श्लोक के साथ थोड़ी देर और ठहरिए।

धर्म से पूछें कि यह श्लोक आपके जीवन में कैसे उतर सकता है, और एक शांत, श्लोक-आधारित चिंतन प्राप्त करें।

9.27 पर धर्म से पूछें