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भगवद गीता 3.21

यद्यदाचरति श्रेष्ठस्तत्तदेवेतरो जनः। स यत्प्रमाणं कुरुते लोकस्तदनुवर्तते॥

“श्रेष्ठ व्यक्ति जो-जो करता है, दूसरे लोग वही करते हैं; वह जो मानक बनाता है, दुनिया उसी का अनुसरण करती है।”
  • leadership
  • responsibility
  • example
  • influence

यह श्लोक किस बारे में है

यह श्लोक भगवद गीता के अध्याय 3 से है।

✦ चिंतन

कोई आज देख रहा है कि तुम कैसे जीते हो, कोई बच्चा, कोई दोस्त, तुम्हारा अपना कोई भविष्य रूप। ऐसे जियो जैसे वह सचमुच देख रहा हो।

✦ एक छोटा अभ्यास

आज किसी एक बातचीत में वैसे बर्ताव करो, जैसे तुम चाहोगे कि तुम्हारा कोई प्रिय करे।

अध्याय 3

कर्म योग

क्यों कोई भी कर्म से पूरी तरह बाहर नहीं निकल सकता, और कैसे संसार में कर्म करते हुए भी उससे न बँधा जाए।

इस श्लोक के साथ थोड़ी देर और ठहरिए।

धर्म से पूछें कि यह श्लोक आपके जीवन में कैसे उतर सकता है, और एक शांत, श्लोक-आधारित चिंतन प्राप्त करें।

3.21 पर धर्म से पूछें