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भगवद गीता 2.63
क्रोधाद्भवति सम्मोहः सम्मोहात्स्मृतिविभ्रमः। स्मृतिभ्रंशाद् बुद्धिनाशो बुद्धिनाशात्प्रणश्यति॥
“क्रोध से मोह पैदा होता है; मोह से स्मृति भ्रमित होती है; स्मृति के भ्रम से बुद्धि नष्ट होती है; और बुद्धि के नाश से मनुष्य का पतन हो जाता है।”- anger
- conflict
- betrayal
- control
यह श्लोक किस बारे में है
यह श्लोक नियंत्रण से जुड़ता है।
✦ चिंतन
ग़ुस्सा आना ग़लत नहीं है। पर ग़ुस्से से किया गया काम महँगा पड़ता है।
✦ एक छोटा अभ्यास
आज ग़ुस्से में जवाब देने से पहले, एक गिलास पानी धीरे-धीरे पियो। फिर तय करो।
अध्याय 2
सांख्य योग
कृष्ण यहाँ अमर आत्मा का परिचय देते हैं, कर्म के कर्तव्य की बात करते हैं, और उस मन का आदर्श रखते हैं जो सुख और दुख दोनों में स्थिर रहे।
ये मन के सवाल जिनसे यह श्लोक जुड़ता है
ऐसे सवाल जो असली लोग मन में उठाते हैं, और जिन पर यह श्लोक कुछ कहता है।
इस श्लोक के साथ थोड़ी देर और ठहरिए।
धर्म से पूछें कि यह श्लोक आपके जीवन में कैसे उतर सकता है, और एक शांत, श्लोक-आधारित चिंतन प्राप्त करें।
2.63 पर धर्म से पूछें